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Thursday, February 6, 2014

तप त्याग व दान अपनाने वाला व्यक्ति सच्चा आराधक है : मुनि आत्मरतिविजय

बालोतरा। मनुष्य जीवन का लक्ष्य आत्मसाधना के लिए संयम पथ को स्वीकार कर प्रभु चरणों में समर्पित करने का होना चाहिए। धर्म साधना सांसारिक कार्यों से बढक़र जो जिन शासन में तप त्याग दान को अपनाता है वहीं सच्चा आराधक हैं। ये उद्गार आर्चाय श्री रामचंद्रसुरीश्वर म.सा. के शिष्य मुनि आत्मरतिविजय म.सा.ने व्यक्त किए। दादावाड़ी में आचार्य रेंवतसूरिश्वर म.सा.ने जीवन में प्रभु आज्ञा के साथ शासन,समाज के कार्यों में भी श्रावक वर्ग को जागरूकता, निष्ठा,सर्मपर्ण से कार्य करने का आह्वान किया। मुनि हितरत्नविजय म.सा.ने प्रेरक प्रवचन में स्वजन,भोजन एवं भजन प्रेम से बढक़र शासन प्रेम,राष्ट्र प्रेम की बात कहीं। जीवन में सदैव परमात्मा के आज्ञानुसार शासन सेवा करने का तथा देश भक्ति के साथ बढऩे का लक्ष्य होना चाहिए। ऐसे आचार्यों,भामाशाहों,देशभक्तों के नाम सदैव अमर रहते है। ओसवाल समाज मंत्री ओम बांठिया,वर्षीतप आराधना समिति संयोजक अमृत सिंघवी ने वर्षीतप की भव्य आराधना,तीर्थ यात्राओं एवं संत समागम की बात कहीं। मोतीलाल छाजेड़ परिवार द्वारा स्वागत एवं प्रभावना वितरित की गई। संचालन मोहनलाल सिंघवी ने किया। प्रवचन से पूर्व छत्रियों का मोर्चा पर सकल जैन श्री संघ द्वारा मुनि आत्मरितविजय,हितरत्नविजय,साध्वी श्री पूर्णदर्शना का सौमैया के साथ स्वागत किया गया तथा दादावाड़ी पहुंचे। इस अवसर पर पुखराज छाजेड़,मीठालाल मधुर,कांतिलाल भंसाली,धर्मेश चौपड़ा,नारायण पटवारी,शांतिलाल चौकसी,गौतमसिंह जैन सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित थे।

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