राइटर्स मीट में अंजुम रजबअलि, श्रीराम राघबन,विक्रमादित्य मोट्वानी और
कमलेश पाण्डे हुये रुबरु
अच्छी फिल्म या तो इतेफाक होती है या चम्तकार-कमलेश पाण्डे
जयपुर :
छ्ठे जयपुर अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह-जिफ के तिसरे दिन 43 फिल्मों की स्क्रीनिंग गोलछा सिनेमा और चेम्बर भवन में हुई. सुबह 10:30 बजे से सुरू हुई फिल्मों की कहानियों ने ने दर्शकों को काफी रोमांचित् किया. ऑस्कर की ऑफिसियल एंट्री रही फिल्में- सुंगावा, 15 ईयरस एण्ड वन डे और हार्सेस ऑफ ग़ोड का भी प्रदर्शन हुआ.
चेम्बर भवन में राईटर्स् मीट क आयोजन किया गया. इस मीट में अंजुम रजबअलि, श्रीराम राघबन, विक्रमादित्य मोट्वानी और कमलेश पाण्डेप्रतिभागियो से रुबरु हुये.
राईटर्स मीट के चेयरमेन् अंजुम रजबअलि ने कहा की स्क्रिप्ट को अलग अलग देशों में अलग अलग फोरमेट से देखा जाता है होता है. फिल्म में लय स्क्रींप्ले से आती है. पहले जो ट्रेंड था आज वो बदल गया है.
कमलेश पाणडे ने कहा की मेरा फिल्म लाईन में आना एक एक्सीडेंट है. जब मैने पहली फिल्म अनकही लिखी तो जावेद् अख्तर् ने कहा की ये कौन है जिसने मेरे पेट पर यानि रोजी रोटी पर लात मार रहा है. फिर जलावा, तेजाब, रंग डे बसंती लिखी. उनहोने आगाह किया की नये लेखक जब भी मुम्बई में आये अपने रोजगार की लियी जाये तो एक बेकअप भी साथ रखे. आगे कहा की कहानी सबसे डीफीकल्ट चिज है. इसे रचना आसान नहीं है. कहा की में दबंग टाईप की फिलें नही लिख सकता.
आगे कहा की अच्छी फिल्म या तो इतेफाक होती है या चम्तकार.
स्रीराम राघवन ने कहा की एक अच्छी स्क्रिप्ट एक अच्छी फिल्म के लिये बहुत जरूरी है. एक कहानी ही हीरो बनाती है.
नया दौर यर नये लेखन पर विक्रमादित्य मोट्वानी ने कहा की आजएक अच्छी फिल्म के लिये बेहतर कहानी, संवाद, प्लोट, प्रजंटेशन का होनाबहुत ही जरूरी है.
इस मीट के प्रतिभागीयों से काफी सवाल कजवाब भी किये गये. कमलेशपाण्डे ने एक सवाल के जवाब में कहा की अपनी स्क्रीप्ट् को रजिस्ट्रड पोस्टसे खुद को पोस्ट कर देना चाहीये और इसे खोलना नही चहीये. जब कभीअपनी इस कहानी की मौलिकता पर कोई विवाद हो तो ये सबुत बन सकतीहै.
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