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Saturday, September 3, 2016

एक आशियाना बनाने की जिद




चलो कही दूर एक सुरक्षित आरामदायक आशियाना बसाए। बारिश के मौसम में बारिश के दौरान एक पत्ते की आड़ से शरण लिए मकोड़े। फोटो ओमप्रकाश सोनी। 9414532417 

Wednesday, June 8, 2016

नजरों के सामने होने पर भी इस सांप को आप नहीं पहचान पाएंगे...!

नई दिल्ली। सांप सुनते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं। और अगर सांप अचानक सामने ही आ जाए तो अच्छे-अच्छों की घिग्घी बंध जाती है। सोचिए, तब क्या हो जब सांप आपकी नजरों के सामने ही फन फैलाए हो और आप चाहकर भी उसे नहीं देख पा रहे हों। पहली तस्वीर को गौर से देखिए।

बेहद पुराने पेड़ में आपको कुछ भी खास नहीं लगेगा। आपको सिर्फ पेड़ की छाल ही दिखेगी। लेकिन आप से कहा जाए कि इस पेड़ में ही दुर्लभ प्रजाति का एक सांप छिपा हुआ है तो...। पहली बार में न आपको यकीन होगा और ना ही आपकी नजरों को। दरअसल सच्चाई और खतरनाक है। इस पेड़ में स्टीफन बैंडेड प्रजाति का एक सांप छिपा हुआ है, जो पेड़ के रंग का ही है।
इस अनोखी फोटो को लीन कुक ने फेसबुक पर शेयर करते हुए लोगों से 30 सेकेंड के भीतर इसमें छिपे सांप को ढूंढने को कहा। पेड़ को इंच दर इंच स्कैन करने पर भी कई लोगों को यह खतरनाक सांप नहीं दिखा। बाद में ली ने दूसरी फोटो शेयर की, जिसमें सांप के फन को लाल रंग के घेरे में दिखाया है।

दूसरी फोटो को देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाएंगे। स्टीफन बैंडेड प्रजाति के इस सांप ने खुद को इस पेड़ में इस कदर छिपा लिया है कि इसे ढूंढना नामुमकिन सा ही है।
यह सांप आमतौर पर ग्रे-ब्लैक या भूरे और क्रीम कलर का होता है। तो आगे से आप भी ऐसे सांप से सावधान रहिएगा।

Sunday, June 5, 2016

अरावली की हसीन वादियों में दफन ‘रसिया बालम’ की अमर प्रेम गाथा

प्रेम की खातिर खोदी नाखूनों से झील,फिर भी नहीं मिला प्यार तो त्याग दिए प्राण
संवाददाता चेतन सुन्देशा 9414532417
माउंट आबू। कहते है कि प्रेम दिमाग की एक रूमानी उड़ान है। इसी रूमानी उड़ान की गिरफ्त के चलते प्रेम गं्रथों में कई प्रेमी जोड़ों के नाम इतिहास में दर्ज हो गए,किसी ने इसे रास्ते का पत्थर बनाया तो किसी ने उल्फत का मंदिर। प्यार मगरूर भी है और सुरूर भी। कहते है मांउट आबू की हसीन वादियों में प्रेमी जोड़े ‘रसिया बालम’ ने अपने प्यार की खातिर नाखूनों से हीं झील को खोद डाली।


माउंट आबू का सौंदर्य जितना खूबसूरत है उससे कहीं ज्यादा मार्मिक है इन वादियों में दफन ‘रसिया बालम’ और कुंवारी कन्या की प्रेम गाथा की गवाहीं देता हुआ प्रतीत होता है। इस प्रेम गाथा को आज भी मारवाड़ के हर इलाके में घर-घर गाया जाता है।
मंदिर में रसिया बालम व कुंवारी कन्या की प्रतिमा आज भी मौजूद
माउंट आबू के विख्यात देलवाड़ा मंदिर के पीछे एक मंदिर में रसिया बालम और कुंवारी कन्या की मूर्ति आज भी मौजूद है। मंदिर के बाहर पत्थरों के ढ़ेर के नीचे दफन है इस प्रेम कहानी की खलनायिका कुंवारी कन्या की मां मूर्ति जिसे रसिया बालम ने श्राप देकर पत्थर बना दिया था।
यह है इस प्रेम गाथा का इतिहास
रसिया बालम माउंट आबू में मजदूरी करने के लिए आया था और उसने वहां पर कुंवारी कन्या को देखा तो उसे देखते हीं प्यार में पड़ गया। कुछ ऐसा हीं हाल कुंवारी कन्या का भी हुआ। धीरे-धीरे ये प्यार परवान चढऩे लगा। बताया जाता है कि एक दिन रसिया बालम ने कुंवारी कन्या के पिता के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रख दिया। कुंवारी कन्या के पिता ने प्रस्ताव तो स्वीकार कर लिया,लेकिन इसके बदले में एक शर्त रसिया बालम के सामने रख दी। कुंवारी कन्या के पिता ने उस शर्त में कहा कि अगर वो भोर(सूर्योदय) होने से पहले एक झील को अपने नाखूनों से खोद कर उसके पास आएगा तो वह अपनी बेटी की शादी रसिया बालम से कर देगा। रसिया बालम ने हसते -हसते शर्त को स्वीकार कर दिया और मांउट आबू स्थित मां अर्बुदा देवी को नमन कर जी जान से झील को अपने नाखूनों से खोदना शुरू कर दिया। इधर कुंवारी कन्या की मां को यह विवाह प्रस्ताव किसी भी किमत पर मंजूर नहीं था। कुंवारी कन्या की मां ने इस शर्त को पूरा होने से रोकने के लिए छल कपट का सहारा लिया। इधर झील की खुदाई रसिया बालम भोर होने से पहले खोदकर कुंवारी कन्या के पिता के पास जाने के लिए निकला,जैसे हीं कुंवारी कन्या की मां ने मुर्गे का रूप धारण कर कूकडू कू की बांग दे दी। रसिया बालम ने मुर्गे की बांग को भोर की घोषणा मान ली और निराश होकर वहीं पर अपने प्राण त्याग दिए। लेकिन मरते-मरते वो कुंवारी कन्या की मां के मायाजाल को समझ गया और उसे श्राप दे दिया। श्राप देते हीं कुंवारी कन्या की मां भी उसी जगह पर पत्थर की मूर्ति बन गई। इस धार्मिक प्रेम कहानी का अंत जितना दर्दनाक है उससे कहीं ज्यादा तकलीफदेह है इसका ऐतिहासिक दृष्टि से उपेक्षित होना। अगर इस प्रेम कहानी का दस्तावेजीकरण कर दिया जाए तो इस अमर प्रेम गाथा को इतिहास में उचित स्थान मिल जाएगा और यह अमर प्रेम गाथा पूरे मारवाड़,गोड़वाड़,आदिवासी इलाके में विशेष रूप से राजस्थानी गीतों के माध्यम से लोकगीतों से बाहर निकलकर शायद विश्व की ऐतिहासिक प्रेमगाथाओं में अपना स्थान बना लें।
प्रेमी जोड़े आज भी कुंवारी कन्या की मां को मारते है पत्थर
मांउट आबू की हसीन वादियों में पिकनिक मनाने के लिए देश-विदेश के कोने-कोने से सैकड़ों लोग आते है। इस दौरान प्रेमी जोड़े व अन्य लोग आज भी विश्व के प्रख्यात देलवाड़ा मंदिर के पीछे स्थित रसिया बालम के मंदिर पर जाकर वहां मौजूद कुंवारी कन्या की मां की मूर्ति पर पत्थर मारते है। ये परंपरा सदियों से चली आ रहीं है,जिस कारण आज यह मूर्ति पत्थरों के अंबार के नीचे आज भी विद्यमान है।


वह झील आज ‘नक्की झील’ के नाम से प्रसिद्ध है
रसिया बालम द्वारा खोदी गई झील आज नक्की झील के नाम से प्रसिद्ध है। माउंट आबू में आने वाला हर कोई शख्स इस नक्की झील में बोट की सवारी का आंनद लेना नहीं भूलता। आज नक्की झील मांउट आबू की अमूल्य धरोहर है लंबी चौड़ी यह झील पानी से हरवक्त भरी हुई रहती है और यहा आने वाला प्रत्ये पर्यटक अपनी यादें संजोकर जाता है।
मां अर्बुदा देवी का शक्तिपीठ जहां दर्शन को आते है श्रद्धालु
माउंट आबू स्थित कात्यायीनी शक्तिपीठ मां अर्बुदा देवी का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की रेलमपेल से भरा रहता है। इस शक्तिपीठ पर सैकड़ों श्रद्धालु दर्शक करने के लिए आते है। माउंट आबू आने वाला हर पर्यटक माता के दर्शन करना नहीं भूलता। मां अर्बुदा देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी के अंदर बने मंदिर में जाना पड़ता है उससे पूर्व उनकों पहाड़ी के नीचे झुकना पड़ता है तभी अंदर जा पाते है।
संकलन---हर्ष माली,भजन गायक व लेखक बालोतरा।

Thursday, April 21, 2016

सोशियल मीडिया पर सकारत्मक पहल,बाल विवाह रोकने के लिए ली शपथ

देवासी दर्पण न्युज
रानीवाडा।   समाज मे व्याप्त बाल विवाह जैसी कुप्रथा के चलते बालिकाएं अपने अधिकारो से वंचित रह जाती हे बाल विवाह न केवल बालिकाऔ की सेहत के लिहाज से, बल्कि उनके व्यक्तिगत विकास के लिहाज से भी खतरनाक हे। शिक्षा जो कि उनके भविष्य का उज्जवल द्वार माना जाता हे हमेशा के लिऐ बंद भी हो जाता हे। शिक्षा से वंचित रहने के कारण वह अपने बच्चो को शिक्षित नही कर पाती हे।  जिस उम्र मे बच्चो को अपने स्कुल मे होना चाहिऐ या फिर खेल के मेदान मे जाकर खेलते हुऐ होना चाहिऐ। बेफ्रिकी उनके चेहरे पर झलकनी चाहिऐ।उसी उम्र में मां बाप उन्हे शादी के बंधन में बांध देते हे। जिसके कारण बाळक शिक्षा से और विकास से वंचित रह जाती हे। बाल विवाह  बाल आधिकारो का उल्लघन हे कम उम्र की शादी बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, तथा हिंसा, द्रुव्यवाहार व शोषण मुक्ति से वंचित कर देती हे। और बचपन को निगल जाती हे। बाल विवाह एक सामाजिक समस्या हे अत: इसका निदान सामाजिक जागरुकता से ही सम्भव हे। सो समाज को आगे आना होगा तथा बालिका शिक्षा की अलख जगाकर  बढावा देना होगा। जो कि आगामी 15 मई को जालौर जिले रानीवाङा क्षैत्र के गांग गाव में समस्त देवासी समाज का राज्य स्तरीय महासम्मेलन हे उस सम्मेलन मे समाज मे व्याप्त कुरुतियां जैसे मृत्युभोज, बाल विवाह, नशा मुक्ती, बालिका शिक्षा को बढावा देना निम्न बातो पर समुन्द्र मंथन किया जाऐगा। सोशियल मीडिया की सकारत्मक   पहल देखने को मिली जिसमे बालविवाह रोकने हेतु चर्चा आज वास्टअप सोशियल मिडिया पर ' बाल विवाह'  प्रमुख सुर्खियो मे रहा।
जैसा की ग्रुप के सदस्य जामताराम आल ने बताया की  व्हाट्सअप पर संचालित " राईका एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट  " के वास्टअप ग्रुप मे बीएल देवासी के निर्देशन में दिन भर चर्चा कर देवासी समाज के 217 लोगो के बीच मे सैकङो लोगो ने  देवासी समाज मे बाल विवाह अपने घर या रिस्तेदारो व समाज में बाल विवाह पर पूर्ण रुप से बंद करवाने की समाज के लोगो के बीच शपथ ली। सनद् रहे कि देवासी समाज में आज के बदलते समय के अनुसार बाल विवाह पूर्ण रुप से हे फिर लोगो ने जागरुकता का परिचय देकर समाज को नई दिशा में जाने का संदेश दिया । इस मुहिम में भीनमाल नगरपालिका चेयरमैन साँवला राम जी देवासी ने भी सहयोग का आश्वाशन दिया व इस शपथ में  भवरलाल, रतनाराम, पुनीत राईका, सरोज देवासी  जिला परिषद सदस्य, मीरा देवासी जिला परिषद् सदस्य, नगरपालिका चेयरमैन सांवलाराम, सरोज देवासी जिला परिषद सदस्य, जयंतिलाल, जोराराम देवासी, पारसाराम, ओम देवासी, भूपाराम, कृष्णा बी देवासी दिल्ली, अशोक देवासी,, रायमल देवासी, रतनाराम ए,  हरिश देवासी, चिमनाराम सहित सैकङो  लोगो ने समाज के व्हाट्सअप ग्रुप में बालविवाह व अन्य सामाजिक कुरीतियो को जड़ से मिटाने के लिये ग्रुप सदस्यों के समक्ष शपथ ली ।

Thursday, April 2, 2015

पॉर्न इंडस्‍ट्री में मां-बेटी का आवेदन, 61 वर्षीय मां का सलेक्‍शन

टोक्यो। जापान के टोक्यो शहर की पॉर्न इंडस्ट्री से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। यासू तोमिता नाम की 61 वर्षीय महिला ने जापान की पॉर्न इंडस्ट्री में पदार्पण किया है।एक अंग्रेजी वेबसाईट में छपी खबर के अनुसार, यासू इस उम्र में भी अपने शरीर को इस काबिल समझती हैं कि पॉर्न इंडस्ट्री में काम कर सकें। यासू कहती हैं कि, 'इस नई शुरूआत से मैं बेहद खुश तो हूं लेकिन नर्वस भी महसूस कर रही हूं।' तोमिता ने आगे बातचीत करते हुए कहा कि मुझे सेक्स करना पसंद है और बूढ़े होने से पहले मेरी अंतिम इच्छा है कि मैं इस क्षेत्र में काम करूं।
अस्पताल में बेहोश मरीजों से सेक्स कर बनाता था वीडियो
जापान की सिल्वर पॉर्न इंडस्ट्री में आने से पहले तोमिता एक कार बनाने वाली फैक्ट्री में काम करती थी। जिसके बाद उन्होंने वयस्क अभिनेत्री बनने के लिए इंटरनेट के जरिए आवेदन किया। इस पूरे प्रकरण में खास बात यह भी है कि यासु तोमिता के साथ उनकी बेटी ने भी इसके लिए आवेदन किया था लेकिन काफी उम्र हो जाने के बावजूद भी पहले यासू को चुना गया। गौरतलब है कि जापान की कुल एक चौथाई आबादी की उम्र 65 साल से भी अधिक है।

Friday, December 12, 2014

अजब रिश्ता: पिता से कराई साली की शादी और बाप-बेटे बन गए साढ़ूभाई

 महेसाणा (गुजरात)। महेसाणा के ७७ वर्षीय रामचरण इंदौरा ने जीवन के एकाकीपन से जूझने के लिए पुनर्विवाह किया। उनकी दूसरी जीवनसंगिनी बनीं ५५ वर्षीय सुमित्रादेवी। इंदौरा की इस 'दूसरी पारी' की शुरुआत के साथ ही पिता-पुत्रों के रिश्तों के समीकरण बदल गए। बाप-बेटे साढ़ू बन गए हैं। नई मां के साथ वह बहू-बेटों के साथ ही रहते हैं। पिता का विवाह भी बड़े बेटे ने करवाया वो भी अपनी परित्यकता बड़ी साली के साथ।हालांकि इस संबंध के लिए रजामंदी देने में सुमित्रादेवी ने लंबा वक्त लिया। सुमित्रादेवी अब अपनी छोटी बहन की सास भी बन गई हैं।
(फोटो: विवाह के बाद रामचरण इंदौरा और उनकी दूसरी जीवनसंगिनी सुमित्रादेवी )


कैसे जीऊंगा, यह पता है:
इंदौरापरिवार की नई मां घर के बड़े बेटे से पांच साल छोटी हैं। रामचरण कहते हैं कि यह फैसला अचरजभरा जरूर है, किंतु हमारे घर की वास्तविकता भी है। खैर, मैं कितना जीऊंगा पता नहीं, लेकिन ये जरूर पता है कि कैसे जीऊंगा। उम्र के इस पड़ाव में पुत्रवधुओं के सहारे जीवनपूर्ण करने के बजाय जीवनसंगिनी के साथ अंतिम समय बिताने के विचार ने मुझे पुनर्विवाह के लिए प्रेरित किया।
 पहले था विरोध बाद में बेटे ने तलाशा:
सेवानिवृत्त रेलकर्मी रामचरणभाई के चार बेटे हैं। विधुर होने पर उन्होंने विवाह का प्रस्ताव घर में रखा तो चारों बेटों ने एक सुर में विरोध किया। बाद में बेटे ही पिता के लिए जीवन साथी की तलाश में लगे। बड़े बेटे चंद्रप्रकाश ने अपनी साली के साथ पिता की शादी करवाई। पेशे से वकील निरंजनभाई इंदौरा पिता रामचरणभाई के साथ महेसाणा में रहते हैं। बड़े बेटे ने कहा, आज सुमित्रादेवी हम चारों भाइयों की मां हैं। हम उनका सम्मान करते हैं।
सौजन्य दैनिक भास्कर 

Sunday, July 6, 2014

बाप रे! अब तक 10000 लोगों संग हमबिस्तर हो चुकी है ये लड़की

मेलबोर्न। हालांकी ये तो अक्सर सुनने में आता है एक इंसान के कई पार्टनर होते हैं, लेकिन इस दुनिया में एक महिला ऎसी भी जो अब तक १० हजार से ज्यादा पुरूषों के साथ सेक्स कर चुकी है। डेली मेल के अनुसार ग्वेनेथ मोंटेनेग्रो नाम की ये लड़की ऑस्ट्रेलिया में सेक्स वर्कर थी जिस दौरान इसने १०,०९१ पुरूषों के संग सेक्स किया। हालांकी ग्वेनेथ ने अब यह काम छोड़ दिया है, लेकिन इसने जो किया वो शायद ही कोई कर पा ए। १०,०९१ पुरूषों के साथ सेक्स कर चुकी ग्वेनेथ एक घंटे के ३००५८ से ६०११६ रूपए चार्ज के रूप में लेती थी। हालांकी इस काम के दौरान ग्वेनेथ ड्रग्स और शराब की आदी भी हो गई थी। ३६ वर्षीय ग्वेनेथ मोंटेनेग्रो का कहना है कि उन्होंने अपनी एस्कोर्ट की जॉब के दौरान कुछ अच्छे पलों को भी एंजॉय किया है।
ग्वेनेथ ने अपनी ऑस्ट्रेलिया की यात्रा और एस्कोर्ट के दौरान हुए अनुभवों एक किताब के जरिए जाहिर किया है। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि ग्वेनेथ ने लिखा है कि १८ की उम्र में उसका गैंगरेप हुआ था। जिसके बाद १९ की उम्र उन्होने पोल डांस शुरू कर दिया था और २१ साल की उम्र तक वह प्रोफेशल एस्कॉर्ट बन चुकी थी।  एक क्रिश्चियन परिवार में जन्मी ग्वेनेथ का जब एक क्लब में नाइटआउट के दौरान ग्वेनेथ का गैंगरेप हुआ तो उसने सेक्स वर्कर बनने से पहले आइटम डांसर बनने का प्रयास किया। उनका कहना है कि जब पहली बार सेक्स किया तो उससें पहले ग्वेनेथ ने बहुत ड्रिंक किया हुआ था और पहली रात को उसें ६० हजार रूपए मिले। इसके बाद अपने इस काम को ३ तीन साल तक करने के बाद ग्वेनेथ को महसूस हुआ कि एस्कॉर्ट का बेहतर तरीके से इस्तेमाल मेलबोर्न में किया जा सकता है और ग्वेनेथ भी बतौर सेक्स वर्कर उस जगह काम करना चाहती थी जहां वेश्यावृति कानूनी तौर पर मान्य हो। हालांकी ग्वेनेथ ने इस काम के दौरान कभी भी अपने असली नाम को जाहिर नहीं होने दिया। जिसके चलते एस्कॉर्ट के दौरान ग्वेनेथ हमेशा अपने नाम बदल-बदल कर जाया करती थी।इतना ही नहीं बल्कि ग्वेनेथ नामी वकील, नेता और म्यूजिशियंस के साथ भी रात बिता चुकी है। इस काम के दौरान ग्वेनेथ को नई कार और कपड़े गिफ्ट में मिले। ग्वेनेथ अपना प्रोफेशन छोड़ने से पहले २० साल की उम्र में एक मल्टी मिलयनेयर से मिली जो वाकई बहुत कूल था। हालांकी अब वो यह काम छोड़ चुकी है और फिलहाल मेलबोर्न में अपना खुद का बिजनेस चला रही है।

Monday, May 26, 2014

क्या बात है, दस रुपये में खरीदी दस लाख की कार

शंघाई । दस रुपये में कार खरीद लेना कोरी कल्पना जैसा लगता है, लेकिन यहां के एक व्यक्ति ने अपनी तिकड़म से इसे सच कर दिखाया। दरअसल वह एक लाख युआन (तकरीबन दस लाख रुपये) की कार को एक युआन (तकरीबन दस रुपये) के बिल पर खरीदना चाहता था।इसके लिए उसने तरीका निकाला कि वह बिल दस रुपये का लेगा और बाकी की रकम नगद में देगा। इस तरीके को सुन कार शोरूम वाले भी तैयार हो गए। लेकिन पूरे मसले में पेंच तब फंसा जब व्यक्ति ने बाकी धनराशि के सिक्के शोरूम वालों को थमा दिए।
सिक्कों को देख सभी हैरान रह गए। फिर भी सभी कर्मचारी इस काम में जुट गए और कार का भावी मालिक सोफे पर बैठ डिलीवरी मिलने का इंतजार करने लगा। गिनती शुरू हुई और आधी रकम गिनने में पूरा दिन लग गया। कर्मचारियों का बुरा हाल देख आखिर में उसे दया आ गई और उसने बाकी रकम की गिनती रुकवाकर क्रेडिट से बिल अदा किया।

Saturday, May 10, 2014

और ये हैं 'मस्तराम' फिल्म के 3 'गंदे' सीन

फिल्म शुरु होने से पहले का सीन
यह फिल्‍म एक ब्वॉयज हॉस्टल से शुरू होती है। हॉस्टल के कुछ लड़के अश्लील कहानियों वाली किताब मस्तराम पढ़ रहे होते हैं। वह लड़के बकायदा एक सेक्स सीन को पढ़कर सुनाते हैं। इस सीन में इन लड़को द्वारा संयुक्त रूप से हस्तमैथुन करता हुआ दिखाया गया है। हिंदी फिल्‍मों में हस्तमैथुन के सीन बहुत कम होते हैं।
शरीर के बहुत पास आया कैमरा
फिल्म के एक दृश्य में एक लंबा बेडरूम सीन दिखाया गया है। इस सीन की खासियत यह है कि इस फिल्म में नायिका के शरीर के बहुत पास तक कैमरा ले जाया गया है। इतना पास कि यह अंतर करना मुश्किल हो जाता है कि दिख रहा अंग आखिर है क्या। हालांकि� पीछे से एक गीत बचाकर माहौल को अश्‍लील होने से बचाने का प्रयास किया गया है।
नर्स के साथ बेडरूम सीन
इस फिल्म में लेखक ऐसी कहानियां लिखने के लिए मन में कई सारी सेक्स परिकल्पनाएं करता है। एक ऐसी ही सेक्स परिकल्पना में लेखक अस्तपाल की एक नर्स के साथ हमबिस्तर होता है। इस सीन को बहुत ही वल्गर तरीके से दिखाने का प्रयास किया गया है। यह दृश्य फिल्म का सबसे वल्गर सीन है।

Friday, April 18, 2014

एक गाय और बैल की शादी करा दी गई. 5000 लोग साक्षी बने. 10 लाख रूपये हुए खर्च और...

10  लाख की शादी में गाजे-बाजे के साथ गंगा गाय को ब्याह ले गया प्रकाश बैल
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में सोमवार को धूमधाम से एक गाय और बैल की शादी करा दी गई. यह शादी हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुई. खास बात यह है कि शादी में पूरा तामझाम वैसा ही था जैसा अमूमन भारतीय शादियों में होता है.
खास खबर के मुताबिक बैंड-बाजा-बारात, नाच-गाना, कपडे, गहने, पकवान, मिठाइयां और ढेर सारे लोग. इस शादी पर १० लाख से भी ज्यादा रूपये खर्च किए गए. ५,००० से भी ज्यादा गांववाले गंगा नाम की गाय और प्रकाश नाम के बैल के ब्याह के साक्षी बने. गंगा के मालिक गोपाल पटवारी ने प्राकृतिक आपदा से खेती को बचाने के लिए इस शादी का आयोजन किया था.
शादी के मौके पर दुल्हन गंगा ने लाल रंग की साडी, जेवर और माला पहनी हुई थी. वहीं, दूल्हा प्रकाश भी कहां पीछे रहने वाला था. उसे रंग-बिरंग शेरवानी, नारंगी पग़डी और शानदार बग्गी पहनाई गई थी. मंडप पर पहले प्रकाश को ले जाया गया, जहां पुजारी मंत्रोच्चार कर रहे थे.
बाद में गंगा की एंट्री हुई और फिर मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए और विवाह के बंधन में बंध गए. इससे पहले हल्दी और गणेश पूजा भी हुई थी.
सूत्रों के मुताबिक आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि और भारी बारिश हुई है और लोगों की खेती बरबाद हो गई. हमारे गांव में ऎसा न हो इसलिए हमने साधु और पुजारी की सलाह पर इस शादी का आयोजन किया. ऎसा करने से हमारे गांव में शांति बनी रहेगी.

Tuesday, April 8, 2014

यहां घरों-दुकानों के बीच से होकर गुजरती है ट्रेन, तस्वीरों में देखें अनोखा रेलवे ट्रैक

हनोई। वियतनाम की राजधानी हनोई में घरों के बीच से गुजरती ट्रेन देखकर कोई भी आश्चर्यचकित हो सकता है। यहां की अनोखी रेलवे लाइन घरों और दुकानों के इतनी नजदीक है कि ट्रेन के निकलने से पहले लोगों को दुकानें बंद करनी पड़ती हैं।
दिन में दो बार गुजरती है ट्रेन
हनोई में स्थित लॉन्ग बीन ब्रिज की ओर जाने वाला यह रूट पुराने शहर की तंग गलियों से होकर गुजरता है। यहां दिन में दो बार शाम ४ बजे और ६ बजे ट्रेन गुजरती है।
लोगों को हो चुकी है आदत
एडवेंचर कम्युनिटी ट्रैवल कंपनी के लिए काम करने वाले आर्मस्ट्रॉंग इस ट्रैक के बारे में कहते हैं, "वियतनाम के हनोई में जब ट्रेन के आने का समय होता है तो लोग अपने घरों के बाहर रखा सामान अंदर कर लेते हैं। यहां के लोग ट्रेन के समय के बारे में खूब जानकारी रखते हैं।"
वह बताते हैं, "हर शाम ४ बजे और ७ बजे आप देखेंगे कि लोग बाहर रखे सामान को अंदर रखने लगते हैं। बाकी के समय महिलाएं यहां बैठकर सब्जियां काटती हैं, बच्चे खेलते हैं और पुरुष कैरमबोर्ड खेलते हैं। मैं सोचता था कि घरों के इतनी नजदीक से ट्रेन गुजरने के कारण यहां काफी एक्सिडेंट होते होंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। यहां के लोगों को इसकी आदत हो चुकी है।"










Wednesday, March 12, 2014

जी हां! १३ करोड़ रुपये में बिका वीआईपी फोन नंबर

अबूधाबी: संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबूधाबी में आयोजित एक ख़ैराती नीलामी में एक टेलीफोन नंबर २१ लाख डॉलर यानी १३ करोड़ रुपये की रिकार्ड कीमत पर बिका है.

मिडिल ईस्ट की सबसे मशहूर टेलीफोन कंपनी एतिसलात का टेलीफोन नंबर 7777-777 और उसके साथ बंपर पैकेज की बोली 78,77777 दिरहम यानी २१ लाख डॉलर पर खत्म हुई

लेकिन कहा जा रहा है कि ये बात इतनी सीधी भी नहीं, बल्कि असल बात यह है कि इतनी ज्यादा रकम अदा करने के बावजूद खरीदने वाला यह दावा नहीं कर सकता है कि ये खास टेलीफोन नंबर उसका हो गया है.

ऐसी बात इसलिए है कि क्योंकि कानूनी लिहाज़ से अबूधाबी में टेलीफोन नंबर सरकार की संपत्ति है. बल्कि इसे यूं कहे कि इतनी बड़ी बोली के बाद फोन नंबर पाने वाले अज्ञात खरीदार अपने फोन नंबर पर आम उपभोक्ता से ज्यादा हक नहीं जता सकता.

इस वीआईपी नंबर का खरीदार अब कंपनी के डायमंड पैकेज का हकदार हो गया है जिसके तहत उसे हर महीने २२,५०० मिनट, २२,५०० टेक्सट मैजेस और १०० जीबी का डेटा मिलेगा यानी वह रोजाना १२ घंटे तक टेलीफोन पर बात कर सकेगा और टेस्कट मैसेज भेज सकेगा.

एतिसलात के मुताबिक अगर आप कंपनी के किसी वीआईपी नंबर के खरीदार बनाने चाहते हैं तो आप यह सुविधा महज़ २३० डॉलर में खरीद सकते हैं.

इस नीलामी में कुछ दूसरे वीआईपी या आसानी से याद रखने जाने वाले नंबर भी बेचे गए. ७७७-७७७० का नंबर तीन लाख ४० हज़ार डॉलर में बिका यानी सिर्फ एक शून्य के फर्क से कीमत में १७ लाख डॉलर का अंतर देखने को मिला.

हालांकि, कंपनी ने नीलामी से पहले यह बात बताई थी कि कंपनी कभी भी वीआईपी नंबर को बदलने का अधिकार रखती है, लेकिन इसके बावजूद खैराती नीलामी में खरीदारों ने दिल खोलकर बोलियां लगाईं और धन की दरिया बहाकर अपने पसंदीदा नंबर खरीदे.

Monday, March 3, 2014

अजगर ने निगल लिया मगरमच्छ. देखिए हैरान कर देने वालीं असल तस्वीरें

मगरमच्‍छ ने बहुत हाथ-पैर मारे, लेकिन अजगर के सामने उसकी एक न चली
क्‍वींसलैंड,
क्‍या आपने कभी किसी सांप को मगरमच्‍छ को निगलते हुए देखा है? जी हां, एक अजगर ने एक पूरे मगरमच्‍छ को अपना भोजन बना लिया और चलता बना.



मगरमच्‍छ खाते ही अजगर का आकार दोगुना हो गया और वह अपने भोजन को पचाने के लिए फिर से झाड़ियों में चला गया. यह पूरा वाकया वहां से गुजर रही क्‍वींसलैंड की एक स्‍थानीय महिला टिफनी कॉर्लिस ने अपने कैमरे में कैद कर लिया.
अनोखी खबरें 

सर्व समाज ने दिया ज्ञापन

हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचार को लेकर सर्व समाज द्वारा राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन बालोतरा वफ्फ बिल के विरोध की आड़ में सुनिश्चित योजना...